हमारा दिल बहुत चोटिल है यारों
तभी तो ज़िंदगी बोझिल है यारों
सफ़र से लौट कर आया नहीं वो
जो कहता था सफ़र कामिल है यारों
नज़ारे याद आते हैं सफ़र के
यहाँ जब सामने मंज़िल है यारों
मेरे अशआर पढ़ते फिर रहे हैं
मुझे कहते थे जो जाहिल है यारों
वहीं पर चूम आया हूँ उसे मैं
जहाँ गर्दन पे उसके तिल है यारों
शरीक-ए-जुर्म अपना बस वही है
हमारे पास जो इक दिल है यारों
तुम्हें लगता नहीं है देखकर क्या
'सहज' होना बहुत मुश्किल है यारों
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