गुलाब सूख गए हैं किताब में सारेनज़र छिपा के गए हैं नक़ाब में सारेहमें लगा कि सभी लोग शांत हैं बैठेमिले ज़हीर-ए-साकी शराब में सारे— Ganesh gorakhpuri