मुख्तलिफ हो कि गमज़दा हो तुम

तुम ही बतलाओ कुछ कि क्या हो तुम

मैं हूँ चलता हुआ सा इक मानव
मुझ में ठहरी सी आत्मा हो तुम

मैं हूँ मजदूर कारखाने का
एक पिक्चर की नायिका हो तुम

देखता हूँ तो देखा करता हूँ
किस तरह सुर्ख़ खुशनुमा हो तुम

मैं हूँ आकाश एक दुनिया का
मुझ में बहती हुई हवा हो तुम

— Akash Rajpoot

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