जो मेरे ज़ेहन में समाया हैबड़ी मुश्किल से याद आया हैएक तू ही नहीं अज़ीज़ मुझ कोदोस्तों ने भी दिल दुखाया हैचाँद, जिस पे फ़िदा है ये दुनियाचाँदनी माँग कर वो लाया हैये इनायत है या कि साज़िश हैउस ने घर पर मुझे बुलाया हैउस को मंज़िल समझ रहा था मैंउस ने इक रास्ता दिखाया है— Akash Rajpoot