अब तक इसी सवाल पे अटके हुए हैं हम

उलझी सी ज़िंदगी है कि उलझे हुए हैं हम

तुम कह रहे थे तुम को भी देखेंगे एक दिन
देखो कि इत्मीनान से बैठे हुए हैं हम

जैसे किसी किताब में सूखा गुलाब हो
वैसे ही दास्तान में रक्खे हुए हैं हम

सब पूछते हैं इश्क़ का कैसे इलाज हो
हम ने पिया है जहर तो अच्छे हुए हैं हम

दुनिया की मुश्किलों का हमें कोई डर नहीं
श्री राम जी का हाथ जो पकड़े हुए हैं हम

— Akash Rajpoot

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