"वापसी मुश्किल है"

अब कहाँ पर पहुँच गए हो दोस्त
तुम तो रस्ता भटक गए हो दोस्त
कितने चौकन्ने हो के निकले थे
फिर भला क्यूँ बहक गए हो दोस्त

कुछ तो सोचो कहाँ पे जाना है
जो भी चाहा है कैसे पाना है
कुछ तो बोलो कि अब करोगे क्या
या फ़क़त वक़्त ही बिताना है

जाने कितनों की आस हो तुम तो
यूँ न हो आस उन की मर जाए
बे-सबब होगा जीतना तब तो
मन अगर उन का तुम से भर जाए

अब भी मौका है तुम ठहर जाओ
इस से पहले कि यूँ ही मर जाओ
ठहरो! सोचो कहाँ पे जाना है
कुछ न रस्ता दिखे तो घर जाओ

घर का रस्ता मैं जानता हूँ मगर
क्या कहूँगा गया मैं ऐसे अगर
उन की आँखें सवाल पूछेंगी
उन की आँखें सवाल पूछेंगी

— Aqib khan

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