ख़ुद से लापता हूँ मैं मुझ से दिललगी न कर

सब से बे-वफ़ा हूँ मैं मुझ से दिललगी न कर

आती है हँसी मुझे तू ख़ुदा है सच बता
सुन बहुत बुरा हूँ मैं मुझ से दिललगी न कर

ख़ैर चाहता है तो भाग जा यहाँ से अब
इश्क़ का ठगा हूँ मैं मुझ से दिललगी न कर

आँच आई उस पे तो फिर मुझे नहीं पता
कितनों का सगा हूँ मैं मुझ से दिललगी न कर

व्यस्त रहता है सदा करता क्यूँ न राब्ते
तुझ से अब ख़फ़ा हूँ मैं मुझ से दिललगी न कर

भूल जा मुझे तू अब मैं हूँ कौन अब तेरा
सब से ही जुदा हूँ मैं मुझ से दिललगी न कर

— Amit Rajvanshi 'Guru'

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