muhabbat hai ziyaada par ana bhi yaar thodii hai | मुहब्बत है ज़ियादा पर अना भी यार थोड़ी है

  - Anis shah anis

मुहब्बत है ज़ियादा पर अना भी यार थोड़ी है
है दरवाज़ा भी इस दिल में फ़क़त दीवार थोड़ी है

ख़ुदा जाने तू सर पर किसलिए ढोता है बोझ इसका
हर इक क़दमों पे गिर जाती है ये दस्तार थोड़ी है

ज़रूरत है अगर झुकने की तो झुक जाइए बेशक
कि रिश्तों के लिए झुक जाना कोई हार थोड़ी है

भरोसा प्यार क़ुर्बानी से ही परिवार चलता है
फ़क़त जुमलों से चल जाए कोई सरकार थोड़ी है

हमारी ख़ामुशी का तुम ग़लत मतलब समझ बैठे
हमारी चुप का मतलब है हमें इक़रार थोड़ी है

नज़र रक्खे अनीस इस पर कि तू कब किस से मिलता है
मेरा दिल शाहज़ादा है ये चौकीदार थोड़ी है

  - Anis shah anis

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