मुहब्बत है ज़ियादा पर अना भी यार थोड़ी है
है दरवाज़ा भी इस दिल में फ़क़त दीवार थोड़ी है
ख़ुदा जाने तू सर पर किसलिए ढोता है बोझ इसका
हर इक क़दमों पे गिर जाती है ये दस्तार थोड़ी है
ज़रूरत है अगर झुकने की तो झुक जाइए बेशक
कि रिश्तों के लिए झुक जाना कोई हार थोड़ी है
भरोसा प्यार क़ुर्बानी से ही परिवार चलता है
फ़क़त जुमलों से चल जाए कोई सरकार थोड़ी है
हमारी ख़ामुशी का तुम ग़लत मतलब समझ बैठे
हमारी चुप का मतलब है हमें इक़रार थोड़ी है
नज़र रक्खे अनीस इस पर कि तू कब किस से मिलता है
मेरा दिल शाहज़ादा है ये चौकीदार थोड़ी है
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