अपने दिल के क़रीब हो कोईएक ऐसा हबीब हो कोईज़ख़्म देकर लगाए ख़ुद मरहमकाश ऐसा रक़ीब हो कोईजो चमन पर लुटाए जाँ अपनीऐसी इक अंदलीब हो कोईदूरियाँ जिस से नापते दिल कीऐसी भी तो जरीब हो कोईवह्म का जो इलाज करता होएक ऐसा तबीब हो कोईसीख इंसानियत की देता होअब तो ऐसा ख़तीब हो कोईमर के ज़िंदा अनीस नाम रहेमैं चढ़ूँगा सलीब हो कोई— Anis shah anis