नहीं मालूम था इतना बुरा होगा
तुम्हें हम से ही इक दिन मसअला होगा
ज़रा तो सोच दिल को तोड़ने वाले
कि तेरा हश्र के दिन हाल क्या होगा
करेगी क्या बता तू रोज़एमहशर में
मेरे जानिब अगर उस दिन ख़ुदा होगा
मिटा दी वक़्त ने सब हसरतें दिल की
सो अब मिल के न कोई फ़ाएदा होगा
मेरे सिर पे है ज़िम्मेदारी बहनों की
सो मुझ को इश्क़ से मुँह मोड़ना होगा
— Mohd Arham















