हमें मालूम था तन्हा करेगी
ये उल्फ़त आँख से टपका करेगी
चले जाएँगे इक दिन हम जहाँ से
उदासी रात दिन ढूँढा करेगी
उसी को देखते रहने की ख़्वाहिश
यक़ीनन आप को अंधा करेगी
नहीं दुश्नाम कोई उस की सुनेगा
बेचारी मेरे बिन वो क्या करेगी
जफ़ा जो कर सके बदले वफ़ा के
मोहब्बत उस के दर सज्दा करेगी
वो शीरीनी मुझे महसूस होगी
वो जब भी ग़ैर को चूमा करेगी
हमारे बा'द ये वहशत हमारी
हमारी लाश पर मुजरा करेगी
— Ashutosh Kumar "Baagi"















