
कोई मेरे जैसा यहाँ पागल नहीं प्यारे
बस एक तू ही इश्क़ में घाइल नहीं प्यारे
मैं ने हज़ारो बार इक ही बात बोली है
ग़ुस्सा किसी भी मस'अले का हल नहीं प्यारे
— Daqiiq Jabaalii
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