राम जैसा पुरुष फिर हुआ ही नहींपाप धरती से कम हो सका ही नहींव्यर्थ पुतले जलाने से क्या फ़ाइदाजब वो अंदर का रावण मरा ही नहीं— Daqiiq Jabaalii