सभी से हट के बस उस पे नज़र जाना
किसी को बज़्म में कल देख कर जाना
तुम्हें गर शौक़ है वा'दा ख़िलाफ़ी का
तो जाओ अपने वादे से मुकर जाना
हमारी ज़िन्दगी के तुम हसीं दिन थे
समय के साथ सो इक दिन गुज़र जाना
तेरे बस की नहीं उस के बिना जीना
भलाई इस
में है 'साहिल' कि मर जाना
— Divyanshu Tiwari SAHIL















