ज़मीं को देखने आए हो बैठो
नई उम्मीद भी लाए हो बैठो
है सूना गाँव का हर इक मुहल्ला
सुना है शहर में छाए हो बैठो
नया घर है नई गाड़ी ये सब ठीक
सुकूँ भी क्या ज़रा पाए हो बैठो
नहीं कोई जहाँ पर खेलते थे
यहाँ सन्नाटे में आए हो बैठो
यही जगदीश में था घर तुम्हारा
'धरम' फिर लौट कर आए हो बैठो
— "Dharam" Barot















