gaur karne jaisi baaton par bhi kar paata nahin gaur | ग़ौर करने जैसी बातों पर भी कर पाता नहीं ग़ौर

  - "Dharam" Barot

ग़ौर करने जैसी बातों पर भी कर पाता नहीं ग़ौर
'इश्क़ में इंसान सुनता ही नहीं या सुनता है और

ग़ैर का क्या छोड़ देता साथ साया भी हमारा
ज़िंदगी में उस अकेलेपन का आना चाहिए दौर

चाहिए था वक़्त मुझको वास्ते मेरे ज़रा सा
उसने समझा ज़िंदगी में आ गया मेरे कोई और

नाम क्या है पूछ के ये मूड को मेरे बिगाड़ा
ठीक करने मूड मेरा अब सुनाओ दोस्त कुछ और

देख कर इंसान अपने सुर बदलता हूँ धरम मैं
जानता हूँ अच्छे से ये किस पे मैं कर पाता हूँ जौर

  - "Dharam" Barot

Ishq Shayari

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