अच्छी किताबें हाथ में गोली नहीं
दे जो भरोसा तोड़ वो यारी नहीं
हर रोज़ डीपी चेंज अब होती नहीं
तस्वीर कोई और तो भाती नहीं
ये अजनबी सारे लगे अच्छे हमें
है साथ जो वो साथ क्यूँ लगती नहीं
उसने दिया जो बोल फिर तो सब सही
ऐसे सही हर बार वो रहती नहीं
प्यारी है सबको नींद अपनी ही यहाँ
बच्चे सुलाए बिन तो माँ सोती नहीं
अनुकूल सारे रास्ते फिर भी मुझे
मंज़िल न जाने क्यूँँ यहाँ मिलती नहीं
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