है इस लिए भी दिल ये परेशान अभी तक
तू लौट के आया न मिरी जान अभी तक
तू आए तो दिल भी कोई त्यौहार मनाए
बरसों से पड़ा है कि जो वीरान अभी तक
नुक़्सान पे नुक़्सान हुआ जाता है लेकिन
कोई नज़र आया नहीं नुक़्सान अभी तक
क्या ख़ाक ही लिक्खेगा कहानी वो किसी की
जो अपने ही किरदार से अनजान अभी तक
तू छोड़ चुका है मुझे दुनिया को ख़बर है
मुझ तक ही न आया तिरा फ़रमान अभी तक
इक फूल किसी दिन मिरे आँगन में खिलेगा
ज़िंदा है इसी आस में गुलदान अभी तक
हैवानियत उस की हमें मालूम नहीं थी
हम जिस को समझते रहे इंसान अभी तक
— Furkan Ansari















