कि दोनो बह रहे हैं राजधानी में
कोई अंतर नहीं ख़ूँ और पानी में
न कोई नौकरी या छोकरी है अब
करें भी क्या जी कर लड़के जवानी में
लगी है आग चारो ओर नफ़रत की
कि बाक़ी ठीक है सब राजधानी में
— Irshad Siddique "Shibu"
कोई अंतर नहीं ख़ूँ और पानी में
न कोई नौकरी या छोकरी है अब
करें भी क्या जी कर लड़के जवानी में
लगी है आग चारो ओर नफ़रत की
कि बाक़ी ठीक है सब राजधानी में
Other ghazal from the same pen
Shers of paani.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling