कि दोनो बह रहे हैं राजधानी में
कोई अंतर नहीं ख़ूँ और पानी में
न कोई नौकरी या छोकरी है अब
करें भी क्या जी कर लड़के जवानी में
लगी है आग चारो ओर नफ़रत की
कि बाक़ी ठीक है सब राजधानी में
— Irshad Siddique "Shibu"
कोई अंतर नहीं ख़ूँ और पानी में
न कोई नौकरी या छोकरी है अब
करें भी क्या जी कर लड़के जवानी में
लगी है आग चारो ओर नफ़रत की
कि बाक़ी ठीक है सब राजधानी में
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