इश्क़ नामी जो इक चीज़ है
दोस्ती उस की दहलीज़ है
शा'इरी की अलग बात है
वर्ना शाइ'र तो नाचीज़ है
सोच हम जैसे काफ़िर का दुख
तेरा क्या तू तो तफ़्वीज़ है
रिंद हूँ पर हूँ औलाद भी
माँ के हाथों का तावीज़ है
छोड़ दे हम तसव्वुर अगर
फिर ख़ुदा तू भी क्या चीज़ है
— Jagveer Singh















