तू चाहे तो गुंडे को सालार रखे
तू चाहे तो डाकू थानेदार रखे
लेखक तू संपादक तू अख़बार भी तू
चाहे उस की गर्दन पर तलवार रखे
इकलौता हाकिम तू तू सत्ताधारी
तेरा कलैंडर जब चाहे इतवार रखे
मुंसिफ़ तेरा और कानून भी तेरा ही
तेरी मर्ज़ी से ही वो दरबार रखे
तेरे क़ब्ज़े में तो हुकूमत की रग-रग
अंधों को कब हक़ है जो सरकार रखे
— Jagveer Singh















