rishta meraa hai usse musalsal banaa hua | रिश्ता मेरा है उस सेे मुसलसल बना हुआ

  - Khalid Azad

रिश्ता मेरा है उस सेे मुसलसल बना हुआ
फिर भी है मेरी आँखों से ओझल बना हुआ

आख़िर को डूब जाऊॅंगा इक रोज़ मैं यहाॅं
दिल में है तेरी याद का दलदल बना हुआ

ताबीर मेरे ख़्वाब की बतलाओ तुम ज़रा
मुझको ही मेरा घर दिखा जंगल बना हुआ

इक राह दिख गई थी मुझे तेरी ओर की
मुद्दत चला हूॅं उसपे मैं पागल बना हुआ

बिगड़ा मेरा नसीब तो ये भी दिखा मुझे
कल तक जो कू-ए-यार था मक़तल बना हुआ

ख़ालिद चलो चलें कि बुलाता है फिर हमें
इक दर था आज फिर से है करबल बना हुआ

  - Khalid Azad

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