आपके हुस्न से मैं कही खो गया
आइने को भुला आपका हो गया
हूर हो या परी पाक जैसे हो मन
आपको पढ़ के मैं हो ग़ज़ल-गो गया
आँख उसकी है क्या मैं बताऊँ भी क्या
मैं उसे देखकर दूर सा हो गया
इक दिया आपको मानता हूँ यहाँ
आपके आने भर से ये तम खो गया
जो मिली आपकी ये मुहब्बत अगर
तो ललित आपका आपका हो गया
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