ख़ुद को हम ख़ुद ही समझाने लग जाएँशायद इसमें यार ज़माने लग जाएँघर वालों का इतना भी तो ख़ौफ़ न होबच्चे अपनी बात छुपाने लग जाएँ— Vijay Anand Mahir