इश्क़ तू ने ज़वाल कर डाला
मेरा जीना मुहाल कर डाला
अब तो शमशीर आ लगे मुझ को
अब तो ख़ुद को निढाल कर डाला
मुझ को इल्ज़ाम-ए-बेवफ़ा देकर
यार तू ने कमाल कर डाला
मैं जो उस पे हराम था शायद
उस ने मुझ को हलाल कर डाला
— Marghoob Inaam Majidi
मेरा जीना मुहाल कर डाला
अब तो शमशीर आ लगे मुझ को
अब तो ख़ुद को निढाल कर डाला
मुझ को इल्ज़ाम-ए-बेवफ़ा देकर
यार तू ने कमाल कर डाला
मैं जो उस पे हराम था शायद
उस ने मुझ को हलाल कर डाला
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