जौन को रोज़ पढ़ रहा है वो
या'नी हर ग़म में आश्ना है वो
है वो जिस के ख़याल में गुम-सुम
कोई लड़की नहीं बला है वो
तू समझता है उस को नाज़ुक सा
माँओं के लाल खा गया है वो
बे-झिझक मिल रहा है वो मुझ से
दर्ज-ए-अव्वल का बे-वफ़ा है वो
सुर्ख़ रंगों से ऐसी क्या रग़बत
हर पलक ख़ून थूकता है वो
तुम करोगे बराबरी उस की
वो जो है जौन एलिया है वो
— Marghoob Inaam Majidi















