
तुम्हें वा'दा निभाना था अजल तक साथ जाना था
किनारे आज बैठे हैं हमें तो डूब जाना था
तुम्हें समझाऊॅं कितना मैं कहा कुछ भी न माना था
ये तुम ने क्यूँ बचाया है उसे मुझ को डुबाना था
— Manish Yadav
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