ab parvarish men to kasar rakkhi nahin | अब परवरिश में तो कसर रक्खी नहीं

  - Manoj Devdutt

अब परवरिश में तो कसर रक्खी नहीं
औलाद ने इज़्ज़त मगर रक्खी नहीं

दुनिया जहाँ में घूमते फिरते रहे
अपने घरों की पर ख़बर रक्खी नहीं

जो ज़िन्दगी में करना था वो सब किया
हसरत कोई भी मुख़्तसर रक्खी नहीं

अब काम करती हर दफ़ा उसकी दुआ
माँ ने दुआएँ बे-असर रक्खी नहीं

जो जी किया वो सब किया उसने यहाँ
उसपर ज़रा सी भी नज़र रक्खी नहीं

सब मुफ़्लिसों को ही दिया है आसरा
हमने ज़मीं अपनी खंडर रक्खी नहीं

माँ बाप की पूजा की है मैंने यहाँ
अपनी सिफ़ारिश दर-ब-दर रक्खी नहीं

  - Manoj Devdutt

Aankhein Shayari

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