ये मेरी ख़ुश-क़िस्मती है ही नहीं

दूसरा मुझ सा कोई है ही नहीं

की हैं ख़ुद से आज जी भर बातें दोस्त
कुछ शिकायत अब बची है ही नहीं

खेल ये प्यादे अभी हारे नहीं
हम ने कुछ चालें चली है ही नहीं

मैं उसे अपना बना लेता मगर
उस को ख़्वाहिश तो मेरी है ही नहीं

रोज़ ही मरने को कहते ज़िंदगी
सिर्फ़ जीना ज़िंदगी है ही नहीं

— Aditya Maurya

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