कुछ न कुछ कहके सबने किनारा कियासो सुना सब वही फिर दुबारा कियाहै अना में छुटा ख़ूब-सूरत वो शख़्सहम ने नुक़सान ख़ुद ही हमारा किया— Aditya Maurya