
मोहब्बत के सफ़र में हम-क़दम होना ज़रूरी है
अगर हो इम्तिहाँ तो हम-सफ़र होना ज़रूरी है
ज़रूरी है समझना हम-नवा के आरज़ू को भी
अगर जो इश्क़ है बाहम-दिगर होना ज़रूरी है
— Mohammad Akram
Other sher from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling