
ख़ुदा का शुक्र परेशानियाँ मिलीं हम को
वगरना बच्चे ही रहते बड़े न हो पाते
अगर ना तोड़ता बैसाखियाँ हमारी समय
हम अपने पैरों पे शायद खड़े ना हो पाते।
— Praveen Sharma SHAJAR
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