आओगे गर तुम मोहब्बत का ज़माना आएगा
फिर से मेरी ज़िंदगी को मुस्कुराना आएगा
चेहरे पे है दिख रहा तेरा दिया हर ग़म अभी
वक़्त कुछ गुज़रेगा तो शायद छुपाना आएगा
जब कभी मुल्ज़िम बनेगी दौर-ए-नफ़रत में वफ़ा
हीर राँझे का कोई हादिस फ़साना आएगा
सर-फिरों की राह में फ़रहाद तक हूँ आ चुका
थोड़ी सी दूरी पे मजनूँ का ठिकाना आएगा
इश्क़ से ग़ाफ़िल रहे हो सो अभी मासूम हो
इश्क़ कर के तुम को भी बातें बनाना आएगा
— Chetan Verma















