जग की ज़ीनत है लोग कहते हैं
तेरी सूरत है लोग कहते हैं
चख के थोड़ी सी देख लो वाइज़
मय में लज़्ज़त है लोग कहते हैं
एक सूरज-मुखी नहीं बन में
घोर ज़ुल्मत है लोग कहते हैं
क्या तुझे भी ये इल्म है कि मुझे
तुझ से उल्फ़त है लोग कहते हैं
बे-वफ़ाई तो हुस्न वालों की
हस्ब-ए-आदत है लोग कहते हैं
हर हसीं शय फ़रेब होती है
इक कहावत है लोग कहते हैं
आओ सौदा कर आज दें दिल का
शुभ-मुहूरत है लोग कहते हैं
पेशा-ए-इश्क़ कर तो लें 'ज़ामी'
थोड़ी उजरत है लोग कहते हैं
— Parvez Zaami















