अब कोई दरमियाँ ही नहीं
दरमियाँ मेरा दिल भी नहीं
पास तेरे तो फिर भी तू है
पास मेरे तो मैं भी नहीं
क्या उदासी की कोई है वज्ह
तन्हा कोई सबब ही नहीं
क्या कभी देखा है उस ने हाँ
क्या कभी वो मिली थी नहीं
किस की ख़्वाहिश है दिल को जिसे
आज तक मैं मिला ही नहीं
रोने को चाहे है दिल हाँ हाँ
शाना पर कोई है ही नहीं
क्या बिछड़ वो गई तुम से हाँ
पर मिरे दिल से बिछड़ी नहीं
'प्रेमी' तुम ने वफ़ा सब से की
पर वफ़ा तुम को पाई नहीं
— Naresh sogarwal 'premi'















