paas mere ye hunar hai hi nahin | पास मेरे ये हुनर है ही नहीं

  - Ankit Raj

पास मेरे ये हुनर है ही नहीं
शहर में मेरा गुज़र है ही नहीं

उस सेे पूछो तुम जहाँ के सारे दुख
उसका कोई हम-सफ़र है ही नहीं

क्या दुआएँ काम आएँगी मुझे
कुछ दवाओं का असर है ही नहीं

छोड़ जाना है जहाँ मैंने अभी
इस जहाँ में तू अगर है ही नहीं

जीत सकता ही नहीं कोई इसे
दिल के रस्ते में जिगर है ही नहीं

काट पाएगा कोई कैसे भला
कंधे पे मेरे तो सर है ही नहीं

जिसके साए में बिता दी 'उम्र राज़
आज जाना वो शजर है ही नहीं

  - Ankit Raj

Shehar Shayari

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