पास मेरे ये हुनर है ही नहीं

शहर में मेरा गुज़र है ही नहीं

उस से पूछो तुम जहाँ के सारे दुख
उस का कोई हम-सफ़र है ही नहीं

क्या दुआएँ काम आएँगी मुझे
कुछ दवाओं का असर है ही नहीं

छोड़ जाना है जहाँ मैं ने अभी
इस जहाँ में तू अगर है ही नहीं

जीत सकता ही नहीं कोई इसे
दिल के रस्ते में जिगर है ही नहीं

काट पाएगा कोई कैसे भला
कंधे पे मेरे तो सर है ही नहीं

जिस के साए में बिता दी उम्र राज़
आज जाना वो शजर है ही नहीं

— Ankit Raj

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