बुरे तो यार तुम लगते नहीं हो
मगर सब कह रहे अच्छे नहीं हो
हमीं तुम पर बहुत मरते रहे हैं
हमीं से इश्क़ तुम करते नहीं हो
मुझे उम्मीद थी तुम से बहुत ही
मगर तुम भी मुझे समझे नहीं हो
— Kaviraj " Madhukar"
मगर सब कह रहे अच्छे नहीं हो
हमीं तुम पर बहुत मरते रहे हैं
हमीं से इश्क़ तुम करते नहीं हो
मुझे उम्मीद थी तुम से बहुत ही
मगर तुम भी मुझे समझे नहीं हो
Other ghazal from the same pen
Shers of ishq shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling