Raj
Raj
Ghazal

यहाँ तू है वहाँ तू है यहाँ वहाँ तू है

है कैफ़ियत ये के अब हर जगह मियाँ तू है

मेरी ये ज़िद है अगर तेरी ये ही ज़िद है तो
जमाई ही नहीं लूँ मैं जो लोरियाँ तू है

तेरे इस उन्स ने क़िस्मत में ज़ख़्म हैं लिक्खे
मैं ज़ब्त-ओ-दस्त हूँ विधवा का चूड़ियाँ तू है

किसी किसी को तो अल्फ़ाज़ तक नहीं है तू
किसी किसी को तो पूरी ही दास्ताँ तू है

बग़ैर आँच के तो रोटी भी नहीं पकती
नसीब वाले हैं वो जिन की सिसकियाँ तू है

किसी को पूछता था मैं नज़र में है कोई
गले से लग के कोई कहता था के हाँ तू है

— Raj

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