बचपन जिए मुझ को ज़माना हो गया
अब तो इरादा बस कमाना हो गया
वो गुल-बदन क्यूँँ क़ैद में दिखती नहीं
कब से सही ये दिल चुराना हो गया
तुम को दिखा इक चोर चोरी करते पर
ग़ुर्बत में हासिल उस को खाना हो गया
फ़न के सहारे कोई फिर रोया था कल
सब के लबों पे उस का गाना हो गया
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