तुम जो चाहो तो किताबों को पलट कर देखो
या तो ऐसा करो बाहों में सिमट कर देखो
उस की तस्ख़ीर नहीं कोई जहाँ में साक़ी
चाँद लाओ या ज़मीं को ही उलट कर देखो
आख़िरी बार मैं कहता हूँ रक़ीबों सुन लो
देखना जो हो तुम्हें दूर से हट कर देखो
— Shadab bastavi
या तो ऐसा करो बाहों में सिमट कर देखो
उस की तस्ख़ीर नहीं कोई जहाँ में साक़ी
चाँद लाओ या ज़मीं को ही उलट कर देखो
आख़िरी बार मैं कहता हूँ रक़ीबों सुन लो
देखना जो हो तुम्हें दूर से हट कर देखो
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