साथ ये तुम क्या कर गए मेरे
दिल के जज़्बात मर गए मेरे
तुमको दिल में मेरे उतरना था
तुम तो दिल से उतर गए मेरे
जो ये कहते थे तेरे साथ हैं हम
यार वो सब किधर गए मेरे
याद आओ मुझे ख़ुदा के लिए
जान-ए-जाँ ज़ख्म भर गए मेरे
जैसे तस्बीह शजर बिखरती है
ऐसे सपने बिखर गए मेरे
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Shajar Abbas
our suggestion based on Shajar Abbas
As you were reading Jazbaat Shayari Shayari