मैं एक रोज़ ख़ुद को ऐसा बनाऊँगाओ खोने वाले तुझ को फिर याद आऊँगाआती है इस क़दर मुझ को याद गाँव कीतुम देखना किसी दिन मैं लौट आऊँगा— Shams Amiruddin