ग़ज़ल से नाम हो जाएगा धंधा हो नहीं सकता
कि जैसा चाहते हो ठीक वैसा हो नहीं सकता
तू चाहे मान या मत मान पर है सच यही लेकिन
कोई मेरी तरह तेरा दिवाना हो नहीं सकता
ज़रूरी है नहीं भेदी हो बाहर का कोई 'चंदन'
विभीषन हो नहीं कलयुग में ऐसा हो नहीं सकता
— Manoj Sharma "Chandan"















