रस्ते में आने वाली ठोकर बना दिया हैइस ज़िंदगी ने मुझ को पत्थर बना दिया हैउस ने कहा के ख़्वाहिश ज़ाहिर करो सो मैं नेउस की जबीं को चूमा और घर बना दिया हैमैं ने तो धूप से डर के थामा था शजर कोहालात ने उसी का शौहर बना दिया है— Asad Khan