उस ने हम पे कई इल्ज़ाम तो झूठे रक्खेहम ने फिर भी मियाँ मज़बूत कलेजे रक्खेमैं तो क्या सोच के दाख़िल हुआ घर में और फिररह गए गजरे यूँ ही मेज़ पे रक्खे रक्खे— Asad Khan