तुम्हें लगता है तेज़ी हो रही है
हमारी उम्र छोटी हो रही है
वहाॅं पे कोई फाॅंसी खा रहा है
वहाॅं पे कोई शादी हो रही है
ख़यालों की ही वेकेंसी न आई
कई शे'रों की भर्ती हो रही है
हमें सपने दिखाए जा रहे हैं
किसी की नींद पूरी हो रही है
हमारा जिस्म सूखा पड़ रहा है
हमारी रूह प्यासी हो रही है
गया वो छोड़ के क़िस्सा करो ख़त्म
असद दफ़्तर में देरी हो रही है
— Asad Khan















