दिल का दरिया दिखाई दे रहा हूँ
ख़ुद में बहता दिखाई दे रहा हूँ
अपनी आँखों को बंद कर के बता
अब मैं कैसा दिखाई दे रहा हूँ
थोड़ा सा रह गया हूँ और सब को
यूँॅं ही पूरा दिखाई दे रहा हूँ
इक ग़ज़ल आधी रह गई है मेरी
सो मैं आधा दिखाई दे रहा हूँ
मैं किसी बस्ती में से काटा गया
एक रक़्बा दिखाई दे रहा हूँ
— Asad Khan















