वो हर इक लफ़्ज़ तू जो कह गया है
जिगर में तीर बनके रह गया है
मुहब्बत का कोई मारा ही होगा
वो जो चुप चाप सब कुछ सह गया है
कहीं साँसें मिले तो बाँध लाना
ज़रा सा ज़हर बाक़ी रह गया है
ये दुख की बात थोड़ी है कि रोऊँ
उमीदों का महल था ढह गया है
ज़रूर आया है उस को याद कोई
वो फिर कुछ कहते कहते रह गया है
इन आँखों की चमक बनना था जिस को
वो कल संग आँसुओं के बह गया है
करेगी याद मेरे बा'द दुनिया
'सफ़र' था नाम ग़ज़लें कह गया है
— SHIV SAFAR















