पतझड़ को तो आना था
सावन को भी जाना था
फूल बड़े ही सुंदर थे
मौसम बड़ा सुहाना था
पानी जमकर बरसा था
बादल तिरा दिवाना था
धूल जमी थी सूरत में
आईना अनजाना था
बात चली थी लंबी कुछ
क़िस्सा बड़ा पुराना था
करना पड़ा बड़ा दिल को
उस का यही ठिकाना था
— Shivangi Shivi















