ख़ुदा कुछ सोच कर तूफाँ बनाता हैदुआएँ दे उसे वो माँ बनाता हैख़ुशी में वो अता करता है सब को माँजो ना-ख़ुश हो तो फिर बिन माँ बनाता है— SIDDHARTH SHARMA